नमस्कार, यह रेडियो गजगमिनियां गप्तानपुर है। आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं बांका जिले की कहानी, इसको लिखा है श्रीमती नीतू सिंह बांका बिहार ने फिल्मांकन अखंड गहमरी का और आवाज दी है गजगमिनियां ने।

जमुई तो उनका केवल घर था। जान तो बसती थी उनकी बांका में। बांका से इतना प्यार कि मुख्यमंत्री से विद्रोह कर दिया केवल बांका के लिए और आ गये रणक्षेत्र में केवल अपने नाम पर, अपने प्यार के भरोसे और भरोसा कायम रहा। जीत कर भारत की संसद में पहुंच गये। मगर बहुत ही जल्द पूरे बांका को रूला कर विदा हो गये संसार से। किराये की भीड़ नहीं आई थी उनकी अंतिम यात्रा में, उनके जीवन के अंतिम सफर में। रोते बिलखते जिसको जहां खबर मिल चल दिया अपने नेता, अपने बेटा के अंतिम दर्शन में ऐसे थे बांका के सांसद दिग्विजय बाबू जिसे बांका की जनता प्यार से दादा कहती थी। आज उनके ही बांका की कहानी मैं आपको सुनाने जा रही हूं।
शुरू करते हैं दादा की महत्वाकांक्षी बांका रेल परियोजना के बांका रेलवे स्टेशन से, यह है बाका का रेलवे स्टेशन, इसके बाद खुद की जितनी जमीन है उतनी तो शायद भारत के किसी रेलवे स्टेशन के पास नहीं होगी। आप देख सकते हैं गजब का सुन्दर एवं साफ सुधरा रेलवे स्टेशन बनाया हमारे दादा ने। पूर्व रेलवे के माल्दह डिवीजन के तहत आने वाले बांका जिले के बांका रेलवे स्टेशन पर कुल 3 प्लेटफार्म है। बाहर आने जाने का रास्ता प्लेटफार्म नम्बर 1 पर है। यह रेलवे स्टेशन वर्ष 2003 में बन कर तैयार हुआ। यहां पहली एक्प्रेस ट्रेन बांका राजेन्द्रनगर एक्प्रेस वर्ष 2006 में चलाई गई थी। आज यहां से भारत के कई शहरों में जाने के लिए ट्रेने उपलब्ध हैं। जो देवघर एवं भागलपुर होते हुए चलती हैं।
वर्ष 2021 में इस मार्ग का विद्युतिकरण किया गया। पहले बांका केवल बांका से भागलपुर ट्रेन जाती थी लेकिन वर्ष 2022 में बांका भागलपुर रेलवे परियोजना का विस्तार कर झारखंड के देवघर जिले से जोड़ दिया गया जिससे भागलपुर देवघर की दूरी ट्रेन मार्ग से 100 किलोमीटर कम हो गई। बांका सड़क मार्ग से देवघर और भागलपुर से भी जुड़ा है।
अनवा साम्राज्य की स्थापना का गौरव प्राप्त बांका अंग प्रदेश के राजा दानवीर कर्ण के अधीन था। आजादी के बाद यह शहर बिहार राज्य के भागलपुर जनपद के अधीन हुआ। 21 फरवरी 1991 को बिहार के तत्कालिन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने भागलपुर से एक अनुमंडल, 11 प्रखंडों, 2111 गांवों, 185 पंचायतों के साथ दो शहरी क्षेत्र बांका नगर परिषद व नगर पंचायत अमरपुर को काट कर बांका को एक नई पहचान देते हुए इसे जनपद घोषित कर दिया। बांका जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। बांका का एक प्राचीन महत्व भी है। जिला मुख्यालय से 18 किमी की दूरी पर बौंसी प्रखंड में पुराणों में वर्णित मंदार पर्वत स्थित है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन में मथनी के रूप में प्रयोग किया गया था। पर्वत पर रस्से के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। मथानी में लपेटने के लिए जो रस्सा प्रयोग किया गया था वह आज भी विद्यमान है। प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में गौरवशाली बौंसी मेला का यहाँ आयोजन 14 जनवरी से प्रत्येक वर्ष किया जाता है जो पूरे एक माह चलता है। मंदार पर्वत महाभारत काल के स्कन्द पुराण की एक कहानी से भी जुड़ा है | इस स्थान का इतना महत्व है कि यहां ब्रिटिश काल से ब्रॉडगेज पर रेलगाड़ियाँ चलती रही है। 44 किमी रेल लाईन भागलपुर के मंदार हिल तक बिछाई गई है। ये रेल लाईन रजौन, बाराहाट और बौंसी प्रखंड को भागलपुर से जोड़ती है। चांदन नदी के पास भगवान शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर जेठोरे पहाड़ी में है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे देवघर मंदिर का भाई माना जाता है।
बांका शहर चानन और ओढ़नी नदी से घिरा हुआ है। यदि देखा जाये तो बांका में पत्थर, बालू और जंगल के सिवा कुछ नहीं है। कोई बड़ा उद्योग, बाजार, कारखाने जैसी रोजगार परक कोई योजना बांका में आपको दिखाई नहीं देगी। यहॉं के लोग मुख्यत: स्व व्यवसाय या खेती करते है और नहीं तो वह मुम्बई दिल्ली जाकर काम करते हैं और अपने परिवार का पेट भरते हैं। बांका जनपद की पूर्वी और दक्षिण सीमाएं झारखण्ड राज्य के क्रमशः गोड्डा और देवघर जिले से मिलती हैं जबकि पश्चिम एवं उत्तर-पूर्व में यह क्रमशः जमुई और मुंगर जिले को छूती हैं |
बिहार के बांका जिले का कुल क्षेत्रफल 3,020 वर्ग किमी है. इस जिले के अंतर्गत 11 प्रखंड अमरपुर, बांका, बाराहाट, बेलहर, बौंसी, चान्दन, धोरैया, फुल्लीडूमर, कटोरिया, रजौन और शम्भूगंज हैं. वहीं जिले में पांच विधानसभा सीट बांका, बेलहर, अमरपुर, कटोरिया और धोरैया है। बांका जिले की मुख्य भाषा बुंदेली है ।यदि स्वतंत्रता सेनानी की बात करे तो पटना सचिवालय कांड में शहिद सतीश चन्द्र झा को याद किया जाता है उनकी प्रतिमाएं ढाकामोड़ के चौराहे सहित झिलै में कई जगह लगी है ।सतीश चंद्र झा जी की एक प्रतिमा पटना सचिवालय के सामने स्थापित की गई है । कुछ अन्य शहीदों में अद्या प्रसाद सिंह, यमुना प्रसाद सिंह, गूदड़ सिंह बेलहर, महेन्द्र गोप, श्री गोप लकड़ीकोला बांका, पशुपति सिंह बसमत्ता, कटोरिया का नाम उल्लेखनीय हैं | भागलपुर का कुख्यात अखफोड़वा कांड रजौन थाने से ही शुरू हुआ था जो बाँका में ही पड़ता है । इस कांड पर ही गंगाजल फिल्म बनी है।बांका जिले में अमरपुर के पास आपको प्रकृति के नजदीक आने का मौका मिलता है।
इस प्रकार बांका जिले की कहानी समाप्त हुई, यह कहानी आपको कैसी लगी आप हमें जरूर बताईयेगा और चैनल का सस्क्राइवर भी जरूर करीयेगा। हम फिर अखंड गहमरी के साथ हाजिर होगें एक नई कहानी के साथ तब तक दीजिये गजगमिनियां को इजाजत ।
जय हिन्द जय सनातन।
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