इतिहास
एशिया के सबसे बड़े गाँव गहमर में स्थित आदि शक्ति माँ कामाख्या का मंदिर शक्ति पीठों में विशिष्ट महत्व रखता है। इस पवित्र भूमि में कभी जमदग्नि, विश्वामित्र, गाधि-तनय इत्यादि ऋषि-मुनियों का सत्संग समागम हुआ करता था। विश्वामित्र ने यहाँ एक महायज्ञ किया था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने यहाँ से आगे बढ़कर बक्सर में ताड़का नामक राक्षसी का वध किया था। मंदिर की स्थापना के बारे में कहा जाता है कि पूर्व काल में फतेहपुर सीकरी में सिकरवार राजकुल पितामह खाबड़ जी महाराज ने कामगिरि पर्वत पर जाकर माँ कामाख्या देवी की घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ ने सिकरवार वंश की रक्षा करने का वरदान दिया था।
कैसे पहुँचें
मां कामाख्या धाम मंदिर सड़क, जल एवं रेलमार्ग से सीधा जुड़ा हुआ है। गहमर इसका निकटवर्ती रेलवे स्टेशन है। गाजीपुर से बिहार जाने वाली नेशनल हाईवे 124सी के किनारे यह मंदिर स्थित है। गहमर गंगा घाट यहां का मुख्य घाट है।
- आज का दिन: लोड हो रहा है…
- दिनांक: …
- आज का व्रत/पर्व: दैनिक दर्शन व पूजन
- 🌅 सूर्योदय: प्रातः 06:12 बजे
- 🌇 सूर्यास्त: सायं 05:48 बजे
- 🌙 चंद्रोदय: सायं 04:30 बजे
🚩 माँ कामाख्या संदेश
माँ आदिशक्ति कामाख्या धाम की पावन धरा पर आने वाले सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना और अनुशासन ही मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा की पहचान है। कतारबद्ध होकर दर्शन करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग प्रदान करें।
- स्थान: कामाख्या धाम (गाजीपुर)
- तापमान: — °C
- मौसम स्थिति: जानकारी जुटाई जा रही है…
- आद्रता (Humidity): –%
- हवा की गति: — km/h
मां कामाख्या धाम फोटो गैलरी
नीचे मां कामाख्या धाम से संबंधित विभिन्न स्थानों की फोटो गैलरी देखें
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