इतिहास
धामदेव ने सुरक्षित स्थान मानकर नीम के पेड़ के पास माँ कामाख्या देवी की प्रतिमा स्थापित की। मान्यता है कि प्रतिमा के योनि मंडल में माँ भगवती का साक्षात निवास है, इसी कारण यह स्थान कामाख्या मंदिर कहलाता है। मंदिर की मूल स्थिति को लेकर मतभेद हैं—कुछ इसे डाक बंगले के पास बताते हैं, तो कुछ वर्तमान स्थान को ही मूल मानते हैं।
Read Moreकैसे पहुँचे
मां कामाख्या धाम मंदिर सड़क, जल एवं रेलमार्ग से सीधा जुड़ा हुआ है। गहमर इसका निकटवर्ती रेलवे स्टेशन है। गाजीपुर से बिहार जाने वाली नेशनल हाईवे 124सी के किनारे यह मंदिर है। गहमर गंगा घाट यहां का मुख्य घाट है।
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प्रमुख आयोजन
गहमर माँ कामाख्या धाम पर चैत्रीय नवरात्रि में लगने वाला मेला नौ दिनों तक बड़े हर्ष-उल्लास से मनाया जाता है। आरती, ढोल-मंजीरे, प्रसाद वितरण और दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ लाखों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।
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