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यूँ ही नहीं कहलाता महापर्व डाला छठ-अखंड गहमरी

महापर्व डाला छठ कार्तिक माह की शुक्‍ल पक्ष के चतुर्थी तिथि से आयोजित होकर सप्‍तमी तिथि को समाप्‍त होने वाला यह पर्व यूँ ही नहीं कहलाता है महापर्व। इसके महापर्व कहलाने के पीछे दर्जनों ऐसे कारण है जो इसे महापर्व की श्रेणी में सबसे ऊपर लाकर खड़ा कर देते हैं। सनातनी समाज का कोई ऐसा तबका नहीं है जो इससे …

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इंद्रियों पर विजय प्राप्त करता है विजयदशमी-धर्मक्षेत्र

जीवन के चतुर्दिक विकास का महानतम दशहरा दस पापों को हरनेवाला, दस शक्तियों को विकसित करनेवाला, दसों दिशाओं में मंगल करनेवाला और दस प्रकार की विजय देनेवाला  है । अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय, दुराचार पर सदाचार की विजय, बहिर्मुखता पर अंतर्मुखता की विजय, अन्याय पर न्याय की विजय, तमोगुण पर सत्त्वगुण की विजय, दुष्कर्म …

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शांति और विजय का द्योतक है नवरात्र-धर्मक्षेत्र

विश्व की मानवीय जीवन में फैली अशांति की रेखा पर शांति का पर्व नवरात्रि है। सृष्टि और प्रकृति का समन्वय एवं सभी साधनों का मूल रूप शक्ति की उपासना है। भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक परम्पराओं की अक्षुन्न बनाने के लिए मानव की सभ्यता का उद्भव सौर धर्म, शाक्त धर्म, शैव धर्म, वैष्णव धर्म, भागवत धर्म, यवन धर्म, यहूदी धर्म, बौद्ध …

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