महापर्व डाला छठ कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि से आयोजित होकर सप्तमी तिथि को समाप्त होने वाला यह पर्व यूँ ही नहीं कहलाता है महापर्व। इसके महापर्व कहलाने के पीछे दर्जनों ऐसे कारण है जो इसे महापर्व की श्रेणी में सबसे ऊपर लाकर खड़ा कर देते हैं। सनातनी समाज का कोई ऐसा तबका नहीं है जो इससे …
Read More »Dharmakshetra
इंद्रियों पर विजय प्राप्त करता है विजयदशमी-धर्मक्षेत्र
जीवन के चतुर्दिक विकास का महानतम दशहरा दस पापों को हरनेवाला, दस शक्तियों को विकसित करनेवाला, दसों दिशाओं में मंगल करनेवाला और दस प्रकार की विजय देनेवाला है । अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय, दुराचार पर सदाचार की विजय, बहिर्मुखता पर अंतर्मुखता की विजय, अन्याय पर न्याय की विजय, तमोगुण पर सत्त्वगुण की विजय, दुष्कर्म …
Read More »शांति और विजय का द्योतक है नवरात्र-धर्मक्षेत्र
विश्व की मानवीय जीवन में फैली अशांति की रेखा पर शांति का पर्व नवरात्रि है। सृष्टि और प्रकृति का समन्वय एवं सभी साधनों का मूल रूप शक्ति की उपासना है। भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक परम्पराओं की अक्षुन्न बनाने के लिए मानव की सभ्यता का उद्भव सौर धर्म, शाक्त धर्म, शैव धर्म, वैष्णव धर्म, भागवत धर्म, यवन धर्म, यहूदी धर्म, बौद्ध …
Read More »बांका की कहानी नीतू की कलम से गजगमिनियां की जुबानी
नमस्कार, यह रेडियो गजगमिनियां गप्तानपुर है। आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं बांका जिले की कहानी, इसको लिखा है श्रीमती नीतू सिंह बांका बिहार ने फिल्मांकन अखंड गहमरी का और आवाज दी है गजगमिनियां ने। जमुई तो उनका केवल घर था। जान तो बसती थी उनकी बांका में। बांका से इतना प्यार कि मुख्यमंत्री से विद्रोह कर दिया केवल …
Read More »श्रावणी एवं रक्षाबंधन पर्व पर विशेष-डॉ प्रभात पांडेय
ज्ञान के अवतरण का, नारीशक्ति के प्रति श्रद्धा का महापर्व 30 अगस्त को श्रावणी एवं रक्षाबंधन का पर्व है मान्यता है कि इसी दिन एकोऽहं बहुस्याम्’ की ब्रह्म आकांक्षा पूर्ण हुई थी। एक से दो और दो से अनेक होने को विकास यात्रा पर सभी का एकदूसरे से सहयोग, संपर्क और स्नेह की डोर से बंधे होने की दिव्य एवं …
Read More »भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य -गोप कुमार
पुरातन काल से ही भारतीय संस्कृति अंतर्मुखी विचार धारा की प्रतिपादक रही |. पंच तत्व रचित देह को भी मिथ्या कहा , परंतु उसी शरीर मे बसी आत्मा को तत्वसार कहा| तथा इसे जीव , परमात्म अंश कहा| सारी की सारी विषय वस्तु इसी तत्वसार पर केंद्रित है यानि भारतीय संस्कृति जहाँ आत्मा को अधिष्ठाता मानते हुए अध्यात्म शास्त्र पर …
Read More »आखिर क्यों नहीं खुलती साहित्यकारोें की जुबान मुस्लिम अत्याचार पर
आखिर क्यों नहीं खुलती साहित्यकारोें की जुबान मुस्लिम अत्याचार परबस हिन्दू वाटस्एप समूह बनाकर ही निकलेगी भड़ास, हाथ क्यों कॉंप रहे हैं खुलेआम लिखने मेंमुस्लिम तुष्टिकरण नीति का समर्थक बिना नहीं चलेगी साहित्यकारिता की दुकान कौन कहता है कि साहित्यकार मुस्लिम तुष्टिकरण नीति का समर्थक नहीं है, है। कौन कहता है कि हिन्दूओं के मरने और सतानत के मटियामेट होने …
Read More »कौन-कौन से चक्रवात हुए एक्टिव
कीला चक्रवात : अरब सागर में कीला तूफान 29 अक्टूबर 2011 को एक्टिव हुआ था। जोकि 4 नवम्बर 2011 तक एक्टिव रहा था। ये अरब सागर से निकल कर यमन से टकराया था। भारत में इसका कोई असर नहीं हुआ था।मुर्जन चक्रपात : 23 दिसम्बर से 26 दिसम्बर तक 4 दिनों तक अरब सागर में 2012 में एक्टिव रहा था। …
Read More »कहावत घाघ की
पुराने समय में जब आधुनिक तकनीकों का प्रचलन नहीं था, उस समय मौसम आधारित भविष्यवाणियां सटीक होती थीं, जो अनुभवी लोगों द्वारा समय-समय पर की जाती थीं। ऐसे ही अनुभवी कवियों में माने जाते हैं, अकबर के समय के महाकवि घाघ। इनकी जन्मभूमि कन्नौज के पास चौधरी सराय नामक ग्राम बताई जाती है। कहा जाता है अकबर ने प्रसन्न होकर …
Read More »होली का वास्तविक स्वरूप –
इस पर्व का प्राचीनतम नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है । यथा–तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष) अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह।(भाव प्रकाश) । अर्थात् तिनके की अग्नि में भुने (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं …
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