Dharmakshetra

सनातन धर्म पर राजनीति-अखंड सिंह गहमरी

स्‍नेही स्‍वजन, आज इस पोस्‍ट को मैं अखंड गहमरी बहुत ही व्यथित मन से लिख रहा हूँ। व्यथित मन से लिखने का तात्‍पर्य यह बिल्‍कुल नहीं हैं कि मैं हार कर लिख रहा हूँ क्‍योंकि मैं देश के लिए मरने वालो में नहीं हूँ बल्कि मैं देश के लिए मार देने वालों में हूँ। आप मर गये तो क्‍या फायदा, …

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आज भी विश्‍वास नहीं होता-अखंड गहमरी

मैं जो लिखने जा रहा हूँ उसका एक एक अक्षर उसी प्रकार है जिस प्रकार संसार का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु है। आज हिन्दुत्‍व पर आधारित श्रीमती का‍ंति शुक्ला भोपाल द्वारा संस्थापित, श्रीमती रेनुका सिंह के सरंक्षण श्रीमती पूजा सिंह के प्रकाशन और मेरे संपादन में गहमर से प्रकाशित धर्मक्षेत्र का शुभारंभ 11 बज 11 से 11:49 मिनट के बीच …

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कब तक चलेगी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति-अखंड गहमरी

हाबड़ा स्टेशन के पास बने चर्च के सामने एक पान की दुकान है जो बनारसी सादी पत्ती का पान बेचता है। आज शाम मैं उसी दुकान पर पान खाने के लिए जा रहा था और मुझे खाना भी पैक कराना था, पान की दुकान के बगल में हिंदू होटल के नाम से एक होटल था। मैं उस पान की दुकान …

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निजामुद्वीन रेलवे स्‍टेशन का बदला जाये नाम -अखंड सिंह गहमरी

हिंदू तो न जाने किस मिट्टी का बना है, वह सबको पूजता है वह तो अफगानी लुटेर के पुत्र चाँद मिया को घर में बैठाता हो तो अजमेर में.हिन्दुओं महिलाओं के साथ अत्याचार करने वाले को ख्वाजा कह कर चादर चढ़ाता है । मैं यह बात आज इस लिए कह रहा हूँ कि आज जब मैने हिन्दुस्तान की राजधानी में …

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ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में अंतर

भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों का बहुत महत्त्व रहा है। ऋषि मुनि समाज के पथ प्रदर्शक माने जाते थे और वे अपने ज्ञान और साधना से हमेशा ही लोगों और समाज का कल्याण करते आये हैं। आज भी वनों में या किसी तीर्थ स्थल पर हमें कई साधु देखने को मिल जाते हैं। धर्म कर्म में हमेशा …

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लक्षमणेश्वर महादेव मंदिर

लक्षमणेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता यह है कि शिवलिंग में एक लाख छिद्र है इसीलिये इसका नाम लक्षलिंग भी है।लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर जो की शिवरीनारायण से 3 किलोमीटर और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120 किलोमीटर दूर खरौद नगर में स्तिथ है। कहते है की भगवन राम ने यहाँ पर खर व दूषण का वध किया था इसलिए इस जगह …

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नई शुरुवात करने का पर्व होली-विवेक रंजन श्रीवास्तव

              हमारे मनीषियो द्वारा समय समय पर पर्व और त्यौहार मनाने का प्रचलन ॠतुओ के अनुरूप मानव मन को बहुत समझ बूझ कर निर्धारित किया गया है .जब ठंड समाप्त होने लगती है , गेंहूं चने की  नई फसल आने को होती है , मौसम में आम की बौर की महक की  मस्ती छाने …

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शिव भगवान का आध्यात्मिक, पौराणिक तथा शास्त्रीय महत्व-डॉ.नीलिमा तिग्गा

सनातन संस्कृति शास्त्र अर्थात सायंस, गणित, अध्यात्म एवं आकाशीय शक्तियों का मिला-जुला संगम है Iहमारे दैनंदीन व्यवहार, पूजा-अर्चना विधि, रीती-रिवाज इसीके अनुसार होते है I कोई भी देवी-देवताओं को फलां फूल-पत्र चढ़ाना हों या भिन्न प्रकार के नैवेद्य जिसे प्रसाद भी कहते है, अर्पण करने के पीछे भी शास्त्रोक्त परिपाठी है I आर्य जन सृष्टि की पूजा-अर्चना करते थे I …

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ठेकुआ, चावल के लड्डू व कचवनिया ऐसे बनायें।

महापर्व डाला छठ में प्रसाद के रूप में कई व्‍यंजन खुद बनाने पड़ते हैं, जिनके बनाने की संम्‍पूर्ण विधि हम यहॉं प्रस्‍तुत कर रहे हैं, वह भी आसान भाषा में। आवश्‍यक सामाग्री -: ठेकुआ बनाने के लिए आवश्‍यक सामाग्री की मात्रा आपको कितना बनाना है उस पर निर्भर करता है। ठेकुआ बनाने में आटे की मात्रा का आधा चीनी या …

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छठ पूजन के पूजन सामाग्री एवं अन्‍य

पर्व के विभिन्‍न अवसरो पर प्रयोग होने वालो गेहूँ धुलाई के लिए आवश्‍यकता अनुसार अच्‍छी तरह से बिना हुआ गेहूँ, धोने के लिए शुद्व पानी, सुखाने के लिए एक स्‍वस्‍छ चादर, गेहूँ सुखाते समय ध्‍यान रखें उसे मानव तो मानव पशु-पक्षी भी जूठा मत करें। गूेहूँ सूख जाने के बाद उसे साफ हुई मशीन में पिसायें। लौका भात के दिन …

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