इस पर्व का प्राचीनतम नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है । यथा–तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष) अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह।(भाव प्रकाश) । अर्थात् तिनके की अग्नि में भुने (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं …
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सनातन धर्म पर राजनीति-अखंड सिंह गहमरी
स्नेही स्वजन, आज इस पोस्ट को मैं अखंड गहमरी बहुत ही व्यथित मन से लिख रहा हूँ। व्यथित मन से लिखने का तात्पर्य यह बिल्कुल नहीं हैं कि मैं हार कर लिख रहा हूँ क्योंकि मैं देश के लिए मरने वालो में नहीं हूँ बल्कि मैं देश के लिए मार देने वालों में हूँ। आप मर गये तो क्या फायदा, …
Read More »आज भी विश्वास नहीं होता-अखंड गहमरी
मैं जो लिखने जा रहा हूँ उसका एक एक अक्षर उसी प्रकार है जिस प्रकार संसार का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु है। आज हिन्दुत्व पर आधारित श्रीमती कांति शुक्ला भोपाल द्वारा संस्थापित, श्रीमती रेनुका सिंह के सरंक्षण श्रीमती पूजा सिंह के प्रकाशन और मेरे संपादन में गहमर से प्रकाशित धर्मक्षेत्र का शुभारंभ 11 बज 11 से 11:49 मिनट के बीच …
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