
हाल
माँ के भवन के पूर्व तरफ एक विशाल हॉल बना हुआ है, जहाँ भक्त बैठकर विश्राम करते हैं। वहीं नवरात्रि इत्यादि के समय भक्त यहाँ बैठकर दुर्गा पाठ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान इत्यादि करते हैं। यह हॉल चारों तरफ से खुला हुआ है
काली मां का मंदिर –
मां कामाख्या के दर्शन के बाद भक्त दाहिनी तरफ बने काली मां के मंदिर में मां काली एवं एवम भोले शंकर का दर्शन करके हवन कुंड के तरफ प्रस्थान करते हैं।


माँ दुर्गा का मंदिर :-
माँ के मंदिर के अगल-बगल गुफादार मंदिरों में माँ दुर्गा एवं माँ काली विराजमान हैं। माँ के दर्शन-पूजन के बाद भक्त इनका दर्शन करता है। विभिन्न अवसरों पर भक्तों द्वारा यहाँ अखंड दीप प्रज्वलित किया जाता है।
पूजन कक्ष :-
माँ के भवन के सामने एक कक्ष का निर्माण कराया गया है, जिसमें भजन-कीर्तन, अखंड पाठ, जाप-सिद्धि प्राप्ति हेतु पूजन तथा धार्मिक आयोजन किये जाते हैं। नवरात्रि के समय पूरे नौ दिन रामधुनी का कार्यक्रम होता है


नीम का पेड़ :-
माँ के भवन के सामने एक नीम का बहुत पुराना पेड़ है, जिसके बारे में मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे हृदय से यहाँ अपनी मन्नत का धागा बाँधता है उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। मनोकामना पूर्ण होने के बाद भक्त आकर पूजन कर अपना धागा खोलता है।
राम जानकी मंदिर –
मां के मंदिर के दाहिनी तरह गेट से नीचे उतरते ही दाहिनी तरफ राम जनकी मंदिर है। इस मंदिर में एक तरफ भगवान राम, मां जानकी एवं लक्ष्मण जी मूर्ति है। चैतीय नवमी के दिन मां के दर्शन के बाद लोग इनका दर्शन करना नहीं भूलते।


हनुमान मंदिर –
मां के मंदिर के दाहिनी तरह गेट से नीचे उतरते ही दाहिनी तरफ राम जनकी मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी की प्राचीन मूर्ति की स्थापना हुई है। प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार का यहां भव्य आयोजन होता है।
भैरो मंदिर
माँ के मंदिर के नीचे मंदिर कार्यालय के बगल में भैरो बाबा का मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में भैरो बाबा की काले पत्थर से बनी प्रतिमा है। मान्यता है कि भैरो को माँ से आशीर्वाद प्राप्त है कि भक्त माँ के दर्शन के बाद जब तक भैरो बाबा का दर्शन नहीं करता उसका पूजन सफल नहीं हो सकता। इस लिये भक्त माँ के दर्शन के बाद भैरो बाबा का दर्शन अवश्य करता है।

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