माँ कामाख्या धाम: पवित्र सावन मास में आयोजित होने वाला श्रावणी मेला और सुहाग की कामना
पावन और पवित्र सावन मास के आगमन के साथ ही माँ कामाख्या धाम में पूरे महीने ‘श्रावणी मेले’ का अत्यंत मनमोहक और भक्तिमय माहौल बन जाता है। इस पूरे महीने में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और चारों तरफ भोलेनाथ व माता के जयकारे गूँजते रहते हैं। सावन के महीने में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह धार्मिक झाँकियाँ और झूले सजाए जाते हैं, जो आने वाले बच्चों और युवाओं को बहुत आकर्षित करते हैं।
इस पूरे पवित्र माह की सबसे बड़ी धार्मिक विशेषता यह है कि सुहागिन महिलाओं द्वारा माँ को सिन्दूर अर्पित करने की विशेष परंपरा निभाई जाती है। महिलाएँ माता को समर्पित इस पावन सिन्दूर को बहुत ही श्रद्धा के साथ अपने ‘सिन्दोरा’ (विवाह के समय के पारंपरिक लकड़ी या धातु के पात्र) में सहेजकर रखती हैं और माता से अपने पति की लंबी उम्र तथा अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। सावन की इन फुहारों और मेलों के बीच सम्पूर्ण धाम शिवमय और शक्तिमय ऊर्जा से ओत-प्रोत हो जाता है।

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