कांच ही बांस के बहंगिया

कांच ही बांस के बहंगिया (पारंपरिक छठ गीत)

कांच ही बांस के बहंगिया छठ महापर्व के सबसे लोकप्रिय आ भावुक लोकगीतन में से एक ह। एह गीत में छठि मैया के पूजा आ अर्घ्य देवे खातिर बहंगी (कांवर) ले जात भक्त के श्रद्धा आ रास्ते में मिले वाला राहगीर के संवाद के बहुते सुंदर आ मार्मिक वर्णन कइल गइल बा।

छठ पूजा बहंगी
काच्चे ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए
होए ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाए
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए

बाट जे पूछे ना बटोहिया, बहंगी केकरा के जाय,
तू तो आंध्र होवे रे बटोहिया, बहंगी छठ मैया के जाए,
वह रे जे बाड़ी छठी मैया, बहंगी उनका के जाए,
कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए,

होए ना देवर जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाई,
वह रे जो बाड़ी छठी मैया बहंगी उनका के जाए,
बाटे जे पूछे ना बटोहिया बहंगी केकरा के जाय,
तू तो आन्हर होय रे बटोहिया बहंगी छठ मैया के जाए,
वह रे जय भइली छठी मैया, बहंगी उनका के जाए।

निहित शब्द सरल रूप में (शब्दार्थ):

  • काच्चे बांस: कच्चा बांस
  • बहंगिया: कांवर / फल-प्रसाद ढोवे वाला बांस के ढांचा
  • लचकत: लचकता हुआ / झूलता हुआ
  • कहरिया: कहार (भार उठाने वाला)
  • घाटे: नदी या तालाब का किनारा (छठ घाट)
  • बटोहिया: राहगीर / यात्री
  • बाड़ी: है / विद्यमान हैं
  • आन्हर: अंधा / नेत्रहीन

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