धनतेरस पूजा विधि कथा और खरीदारी के नियम

मां कामाख्‍या धाम मंहत आकाश तिवारी जी के कलम से

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का आगमन मनुष्य के जीवन में सुख, समृद्धि और सबसे बढ़कर उत्तम स्वास्थ्य लेकर आता है। परंपरा के अनुसार, इस पर्व की शुरुआत गोवत्स द्वादशी से होती है, जिसे लोक जीवन में बछबारस भी कहा जाता है। हमारी सनातन संस्कृति में गाय को महज एक पशुधन न मानकर साक्षात सर्वदेवमयी जगदम्बा का रूप स्वीकार किया गया है, जिसके पावन विग्रह में तैंतीस कोटि ईश्वरीय शक्तियों का वास होता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की आरोग्यता और लंबी आयु के लिए पूर्ण सात्विक भाव से व्रत रखती हैं। भोर के समय गौ माता और उनके नन्हे बछड़े को जल से स्नान कराकर उनके मस्तक पर चंदन, अक्षत और रोली का तिलक लगाया जाता है। इसके पश्चात उन्हें अंकुरित मूंग, मोठ, चना तथा बाजरे से निर्मित मीठी लापसी बड़े स्नेह से खिलाई जाती है। इस पावन व्रत की यह विशेषता है कि इस दिन घर की महिलाएं न तो गेहूं से बने किसी भोज्य पदार्थ का उपयोग करती हैं और न ही भैंस के दूध या घी का स्पर्श करती हैं, जो वास्तव में गौ-वंश के प्रति हमारी अनन्य निष्ठा और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता को अभिव्यक्त करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पहली बार समुद्र मंथन के पश्चात कामधेनु गाय प्रकट हुई थीं, तब देवताओं ने उनके इसी वात्सल्य रूप की पूजा कर सृष्टि में सुख और संतोष का वरदान प्राप्त किया था।

इसी आध्यात्मिक चेतना का विस्तार अगले दिन त्रयोदशी तिथि को धनतेरस और भगवान धन्वंतरि जयंती के रूप में होता है। सनातन मनीषा कहती है कि संसार में भौतिक संपदा से कहीं बढ़कर जीवन का असली वैभव मनुष्य की निरोगी काया है। पौराणिक आख्यान के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के मध्य दिव्य अमृत की प्राप्ति के लिए क्षीर सागर का महामंथन चल रहा था, तब कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि अपने चतुर्भुज हाथों में आयुर्वेद के महान ग्रंथ, जड़ी-बूटियों और साक्षात अमृत से भरा स्वर्ण कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें देवताओं का परम वैद्य और समस्त चिकित्सा पद्धतियों का आदि गुरु माना जाता है, यही कारण है कि इस पावन दिवस को हम राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाते हैं। धनतेरस से जुड़ी एक और मर्मस्पर्शी पारंपरिक कथा राजा हिम के सोलह वर्षीय पुत्र की है, जिसकी कुंडली में विवाह के ठीक चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था। उसकी नवविवाहित पत्नी ने उस रात अपने पति को सोने नहीं दिया और घर के मुख्य द्वार पर चारों ओर सोने-चांदी के आभूषणों तथा दीपकों का अंबार लगा दिया। जब मृत्यु के देवता यमराज सर्प का रूप धारण कर प्राण हरने आए, तो दीपों के उस महाप्रकाश और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे वहीं बैठकर मधुर भजनों को सुनने लगे, जिससे राजकुमार के प्राण बच गए। इसी स्मृति में धनतेरस की संध्या को घर की देहरी पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके चौमुखी यम दीपक जलाने का विधान है।

इस पावन दिन पर समाज में खरीदारी की एक बेहद सुदृढ़ और समृद्ध सामाजिक परंपरा रही है, परंतु शास्त्रों के अनुसार धनतेरस पर वस्तुओं के चयन में अत्यंत सावधानी रखनी आवश्यक है। इस दिन सुख-समृद्धि की वृद्धि के लिए पीतल के सुंदर कलश, तांबे के पात्र, मिट्टी के नूतन दीये, सादे साबुत धनिया के बीज तथा कच्ची हल्दी की गाठें खरीदना परम मंगलकारी माना जाता है। गृहस्थ जीवन में स्वच्छता और लक्ष्मी की कृपा की प्रतीक मानी जाने वाली सींक वाली नई झाड़ू और गणेश-लक्ष्मी की नक्काशीदार चांदी के सिक्के या मूर्तियां खरीदना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके विपरीत, इस शुभ बेला पर लोहे से बनी नुकीली वस्तुएं, कैंची, चाकू, स्टील के बर्तन, काले रंग के वस्त्र, प्लास्टिक का सामान अथवा कांच से निर्मित कोई भी वस्तु कदापि नहीं खरीदनी चाहिए, क्योंकि इन वस्तुओं का संबंध राहु और केतु जैसी नकारात्मक ऊर्जाओं से माना जाता है, जो घर की सात्विक शांति और बरकत को बाधित कर सकती हैं।


🔥 युवाओं एवं साहित्य प्रेमियों की पहली पसंद 🔥
Trending Youth & Lifestyle

🌸 एवरग्रीन लेडी

👠 फैशन एवं स्टाइल 🏋️‍♀️ फिटनेस व हेल्थ 📸 मॉडलिंग ✈️ पर्यटन व ट्रैवल 💼 करियर व रोजगार

युवाओं और महिलाओं के लिए हॉट फैशन ट्रेंड्स, फिटनेस सीक्रेट्स, देश-विदेश के खूबसूरत पर्यटन स्थल और करियर के बेहतरीन अवसरों का सबसे आकर्षक डिजिटल मंच।

Royal Literary Magazine

📖 साहित्य सरोज

✍️ छंदमुक्त व भावुक कविताएं 📜 संस्मरण व शोध 🎨 साहित्यिक सौंदर्य 🖊️ समकालीन विमर्श

दिल को छू लेने वाली रचनाएं, कालजयी कविताएं, संस्मरण और कलात्मक सौंदर्य से भरपूर हिंदी साहित्य का सबसे प्रतिष्ठित और समृद्ध ऑनलाइन पोर्टल।

Check Also

महालक्ष्मी पूजन एवं दीपावली महापर्व पर क्या करें और क्या न करें

महालक्ष्मी पूजन एवं दीपावली महापर्व पर क्या करें और क्या न करें का विशेष मार्गदर्शक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *