मनाए जाने का कारण और धार्मिक महत्व
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि जब रविवार के दिन पड़ती है, तो इसे ‘भानु सप्तमी’ कहा जाता है। हिंदू धर्म में रविवार का दिन और सप्तमी तिथि दोनों ही प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य को समर्पित हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान सूर्यदेव का पूजन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है, शरीर आरोग्य रहता है और जीवन में यश, कीर्ति व तेज की प्राप्ति होती है।
आवश्यक पूजन सामग्री
तांबे का लोटा, शुद्ध जल, लाल चंदन, रोली, अक्षत (चावल), लाल गुड़हल का फूल, थोड़ा सा गुड़, धूप, घी का दीपक और गेहूं के दाने।
कैसे मनाएं? (पूजा विधि)
- प्रातःकाल अर्घ्य: भानु सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल चंदन, अक्षत, गुड़ और लाल फूल डालें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देना: उगते हुए सूर्य के सामने खड़े होकर
ॐ सूर्याय नमःयाॐ घृणि सूर्याय नमःमंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें। जल की धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें। - आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ: अर्घ्य देने के पश्चात वहीं बैठकर ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करें। इस दिन नमक रहित फलाहार व्रत रखने का विशेष विधान है।
क्या करें और क्या न करें
- क्या करें:
- इस दिन गाय को गुड़ और गेहूं खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- सूर्य देव की पूजा के बाद पिता व घर के बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लें।
- क्या न करें:
- इस दिन भोजन में नमक का सेवन करने से बचें।
- सूर्योदय के बाद देर तक न सोएं और किसी का अनादर न करें।

maakamakhya.org.in Maa Kamakhya Dham
One comment
Pingback: maakamakhya.org.in