भोरवे में नदिया नहाईला आदित मनाईला (पारंपरिक छठ गीत)
एह करुण आ भक्तिमय लोकगीत में निसंतान नारी के सामाजिक ताना-बाना आ सूर्यदेव के निष्ठापूर्वक आराधना से संतान प्राप्ति के अटूट विश्वास के बहुते मार्मिक ढंग से सुनावल गइल बा।
भोरवे में नदिया नहाईला आदित मनाईला हो
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो
अस धरवाईब सईया अन्हरिया से बोझिल हो
बाबा अँगने में मांगीला अंजोर ई मथवा नवाईला हो
गजमोती चउका पुराईला अंचरा बिछाईला हो
बाबा अँगने में फूलवा तs लागेला फलवा न खाईला हो
ताना देके कहेले गोतीनिया ई बाँझ बा बहिनिया नु हो
बाबा सुनी सुनी बोलिया गोतीनिया मो लोरवा बहाईला हो
चुप रहु धीर करूँ दुखिया ना सुन रही कोखिया नु हो
बस आजु के नव ये महिनावा होरिला मुस्काईला हो
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो।
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो
अस धरवाईब सईया अन्हरिया से बोझिल हो
बाबा अँगने में मांगीला अंजोर ई मथवा नवाईला हो
गजमोती चउका पुराईला अंचरा बिछाईला हो
बाबा अँगने में फूलवा तs लागेला फलवा न खाईला हो
ताना देके कहेले गोतीनिया ई बाँझ बा बहिनिया नु हो
बाबा सुनी सुनी बोलिया गोतीनिया मो लोरवा बहाईला हो
चुप रहु धीर करूँ दुखिया ना सुन रही कोखिया नु हो
बस आजु के नव ये महिनावा होरिला मुस्काईला हो
बाबा फूलवा अक्षतवा चढ़ाईला सब गुण गाईला हो।

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