भारतीय रेल इतिहास की सबसे अनूठी, रोमांचक और साहसिक यात्राओं में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। देश की एकता, अखंडता, आध्यात्मिक शक्ति और अदम्य मानवीय संकल्प को समर्पित ‘परिक्रमा भारत की’ महा-अभियान का शुभारंभ 12 दिसंबर 2026 को मां कामाख्या धाम गहमर से शुरू होगी। मात्र 21 दिनों में भारत की विशाल भौगोलिक परिधि को रेल और समुद्री मार्गों के अद्भुत संयोजन से पूरा करने का यह महत्वाकांक्षी अभियान अपने आप में एक असाधारण यात्रा बनने जा रहा है। इस अभियान में भारत के पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिणी छोर, पश्चिमी तट से थार मरुस्थल और पंजाब की सीमा से होते हुए हिमालय की गोद में कश्मीर घाटी तक पहुंचने का संकल्प लिया गया है। यात्रा के दौरान देश के महत्वपूर्ण अंतिम छोर और सीमावर्ती रेलवे स्टेशनों सबरूम, लीडो, मुनाबाव, अटारी और बारामुल्ला को स्पर्श किया जाएगा, जिससे यह अभियान भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क और सीमांत क्षेत्रों की वास्तविक भौगोलिक परिस्थितियों को सामने लाने वाला एक अनूठा प्रयास बनेगा। यह यात्रा केवल रेल पटरियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत को भी अपने साथ लेकर चलेगी। मां कामाख्या देवी, देवी सर्वाणी और माता वैष्णो देवी के दर्शन के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ, नागेश्वर और रामेश्वरम को अभियान की आध्यात्मिक यात्रा का प्रमुख केंद्र बनाया गया है। दक्षिण भारत के केरल स्थित प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर की यात्रा इस अभियान को विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करेगी। गुरुवायूर को दक्षिण की द्वारका और भूलोक वैकुंठ के रूप में प्रतिष्ठित माना जाता है। वहीं गुजरात के समुद्र में स्थित रहस्यमयी निष्कलंक महादेव मंदिर इस यात्रा का ऐसा विशेष पड़ाव होगा, जो समुद्र के ज्वार के साथ डूब जाता है और भाटा आने पर पुनः श्रद्धालुओं के सामने प्रकट होता है। पूर्वोत्तर के सबरूम और लीडो से शुरू होकर दक्षिण में रामेश्वरम और कन्याकुमारी, पश्चिम में सोमनाथ और नागेश्वर, समुद्री मार्गों और कोंकण की प्राकृतिक सुंदरता से गुजरते हुए मुनाबाव, अटारी और अंततः बारामुल्ला तक पहुंचने वाली यह यात्रा भारत के मानचित्र को एक अलग ही दृष्टिकोण से देखने का अवसर देगी। पीर पंजाल की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं और ऐतिहासिक रेल सुरंगों को पार करते हुए कश्मीर घाटी के बारामुल्ला में इस महा-अभियान का समापन होगा। ‘परिक्रमा भारत की’ केवल एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं, बल्कि भारत को भारत की ही रेल पटरियों, समुद्री मार्गों, तीर्थस्थलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से जानने-समझने का एक ऐतिहासिक अभियान है। इस यात्रा के माध्यम से देश और दुनिया के सामने भारत की रेल शक्ति, धार्मिक आस्था, प्राकृतिक विविधता, सीमावर्ती जीवन और सांस्कृतिक एकता की ऐसी तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा, जो सामान्य पर्यटक यात्राओं में संभव नहीं है। अखंड प्रताप सिंह का यह अभियान आने वाले समय में भारतीय रेल यात्राओं के क्षेत्र में एक विशेष व्यक्तिगत रिकॉर्ड और प्रेरणादायक यात्रा-वृत्तांत के रूप में पहचान बनाने की क्षमता रखता है। ‘परिक्रमा भारत की’ भारत को केवल देखने की यात्रा नहीं, बल्कि भारत को छूने, भारत को महसूस करने और भारत की आत्मा तक पहुंचने का 21 दिवसीय महा-संकल्प है। इस यात्रा के दौरान 7 कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेगें, जिसमें सम्मान समारोह भी आयोजित होगें।
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