माँ कामाख्या धाम: चैत्र पूर्णिमा का विशेष मेला और ग्रामीण संस्कृति की अनूठी झलक
माँ कामाख्या धाम के पवित्र प्रांगण में चैत्रीय पूर्णमासी (पूर्णिमा) के अवसर पर भी एक विशाल और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले की सबसे अनूठी और खास विशेषता यह है कि यह मुख्य रूप से महिलाओं (औरतों) के लिए समर्पित माना जाता है। इसके पीछे एक व्यावहारिक और पारंपरिक कारण यह है कि चैत्र नवरात्रि और नवमी के नौ दिनों तक चलने वाले मेलों और आयोजनों में महिलाएँ माता के पूजन, व्रत, उपवास और घरेलू धार्मिक अनुष्ठानों की व्यस्तताओं के कारण मेले का पूरा आनंद नहीं उठा पाती हैं।
यही वजह है कि वे पूर्णमासी के पावन दिन विशेष रूप से समय निकालकर माँ के दरबार में दर्शन-पूजन करने आती हैं। इस दिन महिलाएँ अपनी आवश्यकता की घरेलू वस्तुएं, श्रृंगार सामग्री, बर्तन तथा बच्चों के लिए खिलौने आदि की जमकर खरीदारी करती हैं। यह मेला आज भी अपने विशुद्ध और पारंपरिक ग्रामीण स्वरूप को सहेजे हुए है। यहाँ शहरी चकाचौंध के बजाय विशुद्ध ग्रामीण परिवेश की महक और जरूरत का हर सामान उचित दाम पर मिल जाता है, जो इस धाम की लोकसंस्कृति को और मजबूत बनाता है।

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