माँ कामाख्या धाम में नवरात्रि की महाष्टमी और विशेष ‘निशा पूजन’ का रहस्य व महत्व
नवरात्रि के पावन पर्व पर अष्टमी तिथि की रात्रि को माँ कामाख्या धाम में एक अत्यंत विशिष्ट और तांत्रिक-आध्यात्मिक महत्व रखने वाली “निशा पूजन” का आयोजन किया जाता है। इस रात्रि की गुप्त और विशेष पूजा का विधान सदियों पुराना है। निशा पूजन की तैयारियाँ संध्या काल से ही शुरू हो जाती हैं और ठीक रात्रि 10 बजे मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इसके पश्चात मंदिर परिसर की विशेष साफ-सफाई की जाती है और परिसर को फूलों व दीपों से सजाया जाता है।
माँ कामाख्या का अलौकिक और भव्य श्रृंगार संपन्न होने के बाद ठीक मध्यरात्रि 12 बजे विशेष निशा पूजा का विधिवत शुभारंभ होता है। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष तंत्र साधना से जुड़ी प्रक्रियाएं संपन्न की जाती हैं। पूजा और आरती का यह क्रम पूरी भव्यता के साथ चलता है, जिसके पूर्ण होने पर माँ के दिव्य दर्शन का सुअवसर प्राप्त होता है।
अगले दिन तड़के सुबह अष्टमी तिथि का प्रारंभ होता है, हालाँकि मुख्य अनुष्ठान रात्रि में संपन्न होने के कारण दिन के समय सामान्य दिनों जैसी ही स्थिति रहती है। इसके तुरंत बाद नवमी तिथि के प्रारंभ होते ही मंदिर प्रांगण में बने विशाल हवन-कुंड में श्रद्धालुओं द्वारा आहुतियाँ देने का दौर शुरू हो जाता है। हवन और पूर्णाहुति के साथ यह अनुष्ठान क्षेत्र के कल्याण की कामना के साथ संपन्न होता है।

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